।। आज का भगवद चिन्तन ॥ 🙏पुरुषोत्तम मास की मंगल बधाई🙏

सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता,  किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........
जय द्वारकाधीश

।। आज का भगवद चिन्तन ॥

पुरुषोत्तम मास की मंगल बधाई...!
       
दुःख में सुख खोज लेना, हानि में लाभ खोज लेना, प्रतिकूलताओं में भी अवसर खोज लेना....!

इन सबको सकारात्मक दृष्टिकोण कहा जाता है। 

जीवन का ऐसा कोई बड़े से बड़ा दुःख नहीं जिसमे सुख की परछाईयों को ना देखा जा सके। 

जिन्दगी की ऐसी कोई बाधा नहीं जिससे कुछ प्रेरणा ना ली जा सके।





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🐂 रास्ते में पड़े हुए पत्थर को आप मार्ग की बाधा भी मान सकते हैं और चाहें तो उस पत्थर को सीढ़ी बनाकर ऊपर भी चढ़ सकते हैं। 

जीवन का आनन्द वही लोग उठा पाते हैं जिनका सोचने का ढंग सकारात्मक होता है।



🐂 इस दुनिया में ज्यादा लोग इसलिए दुखी नहीं कि उन्हें किसी चीज की कमीं है अपितु इसलिए दुखी हैं कि उनके सोचने का ढंग नकारात्मक है। 

सकारात्मक सोचो, सकारात्मक देखो। 

इस से आपको अभाव में भी जीने का आनन्द आ जायेगा।

जय श्री राधे कृष्ण !!
🌹🙏🌹🙏🌹

ध्वान्तस्यैवान्तहेतुर्न भवति मलिनै-
कात्मन: पाप्मनोsपि,
प्राक्पादोपान्तभाजां जनयति न परं
पंकजानां प्रबोधम्।
कर्ता निःश्रेयसानामपि न तु खलु यः
केवलं वासराणाम्,
सोsव्यादेकोद्यमेच्छाविहितबहुवृहद्-
विश्वकार्योsर्यमा व:।।

( सूर्यशतक )

अर्थात : संसार मे अपनी इच्छा से तथा एकमात्र अपने ही प्रयत्नों से अनेक तथा महत्वपूर्ण कार्य करनेवाले, केवल मलिन आत्मा वाले अंधकार के विनाशक नही, अपितु पाप के भी विनाशक, केवल कमलों को ही विकसित करनेवाले नही, अपितु चरणों ( किरणों ) के समीप रहनेवालों को भी परम प्रबोध करनेवाले एवं केवल दिवस के कर्ता नही, अपितु मोक्ष के भी कर्ता - सूर्यदेव आपकी रक्षा करें।

।। जय श्री राम।।

जब भगवान शिव ने माता पार्वती को अपनी चोरी की कथा सुनाई, तो उस कथा को सुनकर माता पार्वती व्यंग्य भरी मुद्रा में हंसने लगी।

भगवान शिव ने कहा, हमने इतने यत्न करके, राम जी के बाल रूप के दर्शन किए, और तुम्हें हंसी आ रही है।

पार्वती जी बोली मैं मानती हूं आपने भेष बदलकर राम जी के दर्शन किए होंगे।

मैं कब अस्वीकार कर रही हूं। 

शिव जी बोले अस्वीकार नहीं कर रही हो तो फिर आप हंसी क्यों? इसमें हंसने वाली क्या बात है?

यह बात अलग है कि हमें अपना भेष बदलना पड़ा। 

मैं मदारी बना, ज्यौतिषि बना, लेकिन फिर भी हम सफल तो हो ही गए।

आप तो यह बताओ तुम्हें हंसी क्यों आईं।?

पार्वती जी ने मुस्कुराते हुए कहा। मुझे तो सहज ही हंसी आ गई। 

भगवान शिव समझ गये, कुछ न कुछ बात अवश्य है।

वह पीछे ही पड़ गए कि मुझे तो तुम्हारे हंसने का कारण बताओ।

पार्वती जी ने मुस्कुराते हुए कहा। 

है मेरे भोलेनाथ,यदि तुम्हें वह दासी न मिलती तो क्या करते ? 

क्या राम जी के दर्शन सम्भव थे ? 

शिव जी ने कहा, वह बात अलग है। 

वह एक संयोग था। 

पार्वती जी ने कहा, उस दासी को जानते हो ? 

वह कौन थी ?।

जब शिव जी ने पार्वती जी से यह सुना तो, एकदम मौन हो गए।

पार्वती जी बोली , उस दासी को अभी भी नहीं पहचान पा रहे हो। 

वह दासी मैं ही थी। 

मानस प्रसंग पढ़ने वाले पाठकों को लगता होगा, कि यह कैसे संभव है कि पार्वती जी की महिमा को शिवजी नहीं जान पाए। 

लेकिन यह सत्य है। 

श्रीमद् देवी भागवत पुराण में ऐसे कितने ही रहस्य हैं, जिन्हें समझने में ब्रह्मा विष्णु महेश सक्षम नहीं है। 

देवी जगदंबा ने उन रहस्यों को स्वयं समझाया है।

माता पार्वती को जगत जननी भवानी कहते हैं। 

भगवान शिव ने यह बात स्वीकार कर ली कि अवश्य आप दासी का रूप बनाकर गई होंगी। 

लेकिन आप वहां गई किस लिए ? 

पार्वती जी ने कहा आप किस लिए गए थे।?

शिवजी ने कहा भगवान श्री रामजी मेरे इष्ट देव हैं, मैं तो उनके दर्शन के लिए गया था। 

पार्वती जी ने कहा मेरे इष्ट भी वही है। 

शिवजी ने कहा आपने दासी का रूप क्यों बनाया?। 

पार्वती जी ने कहा मुझसे तुम्हारा दुख देखा नहीं गया। 

आपको और काग भूसुंडी जी को जब राजमहल के सामने से मदारी का खेल दिखाते हुए भगा दिया गया। 

आपका सामान और डमरू फेंक दिया गया, यह देखकर मुझे अच्छा नहीं लगा। 

आप लोगों ने ज्योतिषी का रूप बनाया तब भी मुझे लग रहा था कि इस तरह यह राम जी के दर्शन कर नहीं पाएंगे,। 

इस लिए मैंने राजमहल की दासी का रूप बनाया,और तुम्हें माता कौशल्या के कक्ष तक पहुंचने का मार्ग सुगम कराया 

माता पार्वती की बातें सुनकर भगवान शिव, आनंदित हुए। 

उस अविनाशी सच्चिदानंद घन परमात्मा की भक्ति में शिवजी और पार्वती जी मग्न हो गए।

वही परमात्मा जिसके लिए महाराज दशरथ जी कहते हैं। 

जाकर नाम सुनत शुभ होई।
मोरे गृह आवा प्रभु सोई।।

इस प्रकार कुछ दिन बीत गए, दिन और रात जाते हुए मालूम नहीं पढ़ते हैं। 

नामकरण संस्कार का समय जानकर, महाराज दशरथ जी ने, अपने गुरुदेव वसिष्ठ जी को बुलवाया, और चारों भाइयों का नामकरण कराया। 

जो आनंद के समुद्र और सुख की राशि महाराज दशरथ जी के सबसे बड़े पुत्र जिनका जन्म माता कौशल्या से हुआ उनका नाम राम ,रखा। 

जो संसार का भरण पोषण करते हैं , जिनका जन्म माता  कैकेई से हुआ , उनका नाम भरत रखा। 

जिनके स्मरण से शत्रु का नाश होता है उनका नाम शत्रुघ्न , रखा।

और जो शुभ लक्षणों के धाम है, श्री राम जी के प्यारे और जगत के आधार हैं, उनका नाम लक्ष्मण रखा।  

लच्छन धाम राम प्रिय
सकल जगत आधार 
गुरु वशिष्ठ तेहि राखा
लक्ष्मण नाम उदार

लक्ष्मण जी और शत्रुघ्न जी का जन्म माता सुमित्रा से हुआ।

धरे नाम गुरु हृदय बिचारी 
वेद तत्व नृप तव सुत चारी 

गुरु वशिष्ट जी ने कहा राजा, तुम्हारे यह चारों पुत्र वेद के तत्व हैं, साक्षात भगवान है, तुम्हारे प्रेम के कारण यह तुम्हारे यहां आए हैं।

अपनी बाल लीलाओं द्वारा, चारों भाई...!

अयोध्यापुरी के नगर निवासियों को सुख प्रदान करते हैं। 

माता कौशल्या जी उन्हें कभी गोद में खिलाती हैं, कभी पालने में झुलाती है।

लै उछंग कबहुंक हलरावै 
कबहुं पालने घालि झुलावै 

एक बार माता कौशल्या ने, श्री राम जी को स्नान कराया और श्रृंगार करके पालने में सुला दिया, फिर अपने कुल के इष्ट देव को स्नान कराकर उन्हें नैवेद्य चढ़ाया।

नैवेद्य चढ़ाकर जब माता कौशल्या लौटकर रसोई में आई, तब क्या दृश्य देखती हैं, यह प्रसंग अगली पोस्ट में। जय श्री राम।।

!!!!! शुभमस्तु !!!

🙏हर हर महादेव हर...!!

जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏

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जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏

पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर:-
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:- 
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science) 
" Opp. Shri Ramanatha Swami Kovil Car Parking Ariya Strits , Nr. Maghamaya Amman Covil Strits, V.O.C. Nagar , RAMESHWARM - 623526 ( TAMILANADU )
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आप इसी नंबर पर संपर्क/सन्देश करें...धन्यवाद.. 
नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

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।। श्री यजुर्वेद प्रवचन ।।औषधियों में विराजमान नवदुर्गा...।।

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