सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता, किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........
जय द्वारकाधीश
।। शास्त्रों में मनुष्य की इन 10 आदतों को माना गया है बुरा, इनकी वजह से होता है नाश ।।
हर कोई व्यक्ति चाहता है कि उसका घर धन- दौलत और ऐशो आराम की सारी सुख सुविधा से भरा रहे। इसके लिए सुख और ऐश्वर्य प्रदान करने वाली देवी लक्ष्मी का उस घर पर स्थाई रूप से वास करना जरूरी होता है। मान्यता है देवी लक्ष्मी जिन घरों में निवास करती हैं वहां पर कभी किसी चीज की कमी नहीं रहती। लेकिन देवी लक्ष्मी उन घरों को चुनती हैं जहां पर हमेशा पवित्रता, धर्म के मार्ग पर चलने वाले लोग और उनके अंदर अच्छी आदतें होती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं व्यक्ति की किन-किन आदतों से धन की देवी लक्ष्मी रूठ जाती हैं।
1.
हिंदू धर्म में दान, भोग और नाश का महत्व बताया गया है। यदि कोई मनुष्य सुविधा संपन्न होते हुए भी जरूरतमंदों को दान नहीं करता है तो निश्चित रूप से कुछ समय बाद उसका धन नष्ट हो जाता है। इसी तरह यदि धन होने के बावजूद वह उसे नहीं खर्च करता है तो भी वह नष्ट हो जाता है।
2.
शास्त्रों के अनुसार आलस्य को मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु माना गया है। कहते हैं कि आलसी व्यक्ति के यहां कभी लक्ष्मी नहीं टिकती हैं। यदि कोई व्यक्ति आज के काम को कल पर टालने की प्रवृत्ति वाला है, तो ऐसे व्यक्ति के पास कभी धन नहीं टिकता। मां लक्ष्मी हमेशा कर्म एवं कर्तव्यनिष्ठ के यहां टिकती हैं, जबकि आलसी व्यक्ति के पास जो धन पहले से होता है, वह भी नाश हो जाता है।
3.
दिन में सोने वाले व्यक्ति के घर में भी लक्ष्मी कभी नहीं टिकती हैं। ऐसे व्यक्ति का धन बहुत जल्दी समाप्त हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार यदि धन की इच्छा हो तो कभी भी दिन में नहीं सोना चाहिए।
4.
मान्यता है कि कामी व्यक्ति के यहां भी मां लक्ष्मी नहीं ठहरती हैं। ऐसे व्यक्ति के पास कितना भी धन हो वह बहुत जल्दी ही नाश हो जाता है। पौराणिक कथाओं में कामी व्यक्ति के पतन के तमाम उदाहरण मौजूद हैं। जहां देवराज इंद्र ने कई बार काम भाव के कारण अपनी सत्ता गंवाई वहीं रावण के विनाश की भी यही वजह बनी थी।
5.
क्रोध भी मनुष्य के धन के नाश का कारण बनता है। शास्त्रों के अनुसार विपरीत परिस्थिति में कभी भी अपना आपा नहीं खोना चाहिए। विपत्ति के दौरान जो लोग संयम खो देते हैं और क्रोध करते हैं, उनका और उनके धन का अक्सर नाश होता है। शास्त्रों में क्रोध को असुरों का गुण कहा गया है और इसी कारण असुर हमेशा देवताओं से हारे हैं।
6.
धन का कभी भी भूलकर अभिमान नहीं करना चाहिए। किसी भी प्रकार का घमंड विनाश का कारण बनता है।
7.
किसी के प्रति ईर्ष्या इंसान की प्रगति में रुकावट बनती है और यह उसके नाश का कारण बनती है। सही अर्थों में ईर्ष्या करने वाला व्यक्ति स्वयं को जलाता है।
8.
किसी भी चीज को लेकर ज्यादा मोह अहितकर होता है। सुख-संपत्ति और धन के विनाश का कारण मोह भी बनता है। दरअसल, जब किसी व्यक्ति को किसी चीज से अत्यधिक लगाव हो जाता है तो वह उसे पाने के लिए गलत और सही के बीच में भेद नहीं कर पाता है। नतीजतन वह अधर्म के रास्ते पर चलता हुआ, अंतत: अपना सर्वस्व लुटा बैठता है।
9.
शास्त्रों में कहा गया है कि संतोषम् परम् सुखम्। अर्थात् संतोष ही जीवन का सबसे बड़ा सुख है। जबकि लालच मनुष्य को विनाश की ओर ले जाता है। लोभ के कारण आदमी वह सब कुछ भी खो देता है जो उसके पास होता है। इसलिए किसी दूसरे के धन को देखकर लालच नहीं करना चाहिए। कौरवों ने पांडवों के धन का लोभ किया लेकिन अंतत: धन और जन दोनों का नुकसान हुआ।
10.
पराई स्त्रियों पर गलत दृष्टि रखने वाले व्यक्ति का मान-सम्मान और धन सब कुछ नष्ट हो जाता है। जो व्यक्ति पर स्त्री पर संबंध रखते हैं या अनैतिक संबंध बनाते हैं, उन्हें जीवन में कभी सम्मान नहीं प्राप्त होता है। ऐसा चाल-चलन न सिर्फ कलंक बल्कि धन और जीवन दोनों के नष्ट होने का कारण बनता है।
जय श्री कृष्ण....!!!!
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पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर:-
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(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science)
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