सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता, किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........
जय द्वारकाधीश
।। श्री रामचरित्रमानस प्रवचन ।।
‼️राम कृपा ही केवलम्‼️
❗संतों से समझा❗
हर्ष शोक से, भोग रोग से, संयोग वियोग से रहित नहीं है।
अतएव धीरज धारण कर विचार - पूर्वक यथाशक्ति कर्त्तव्य पालन करने का प्रयत्न करना चाहिए मोहवश मृतक मनुष्य का स्मरण कर दुःखी होने से मृतक के सूक्ष्म शरीर को दुःख अधिक होता है, क्योंकि जब तक सम्बन्ध शेष रहता है,
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तब तक उसे दूसरी योनि धारण करने में विलम्ब होता है।
यदि सद्भाव से, प्रसन्नतापूर्वक मृतक मनुष्य से सम्बन्ध विछेच्छ कर दिया जाए, तो फिर वह अपने कर्मों के अनुसार शीघ्र, सुगमता से दूसरी योनि धारण कर लेता है।
इस लिए हृदय से सम्बन्ध तोड़ना परम आवश्यक है।
यदि हो सके तो सर्वान्तर्यामी आनन्दघन - भगवान् से थोड़े - थोड़े समय बाद, बार - बार प्रार्थना करो कि वह मृतक पुरुष की आत्मा को शान्ति प्रदान करें।
इस प्रकार का चिन्तन 24 घण्टे में कई बार करना चाहिए जब - जब मोह के आवेश के कारण उनका स्मरण हो, तब - तब हृदय में यह भावना करो कि आपका हमसे कुछ सम्बन्ध नहीं है।
दुःख में धैर्य धारण करना विचारवान का कर्तव्य है।
*🌹🙏जय श्री सीताराम राम राम राम🙏🌹*
यहां सच्चे झूठ आरोप सदा लगते ही रहते हैं।
जब भी कोई आप पर आरोप लगाए, तो सबसे पहले यह देखें कि "आप पर आरोप लगाने वाला व्यक्ति कौन है?
वह सच्चा है यह झूठा है?
यदि कोई झूठा व्यक्ति आप पर आरोप लगाए, तो उसकी चिंता ना करें।"
"क्योंकि आपकी परिस्थितियां आप ही जानते हैं।
आप किस परिस्थिति में कौन सा कार्य करते हैं, क्यों करते हैं, उसके पीछे कितने कारण होते हैं, इन बातों को आप तो जानते हैं।
दूसरे राग द्वेष करने वाले अज्ञानी लोग नहीं जानते। न ही वे इस बात की पूरी परीक्षा करते।
यूं ही किसी पर भी कुछ भी झूठा आरोप लगा देते हैं।
इस लिए उनकी चिंता नहीं करनी चाहिए।"
और यदि कोई सच्चा ईमानदार व्यक्ति आपके विषय में कोई दोष लगाता है, तो उसकी बात पर अवश्य ही पूरा ध्यान देना चाहिए।
तब निष्पक्ष भाव से यह देखना चाहिए कि "वह दोष आपके अंदर है या नहीं?
यदि है, तो कितनी मात्रा में है।
यदि वह दोष आपके अंदर हो, तो उसे दूर करें।"
क्योंकि किसी विद्वान ने कहा है कि "दोष सदा दुख ही देते हैं, और गुण सदा सुख देते हैं।"
कभी - कभी सच्चे लोग भी भ्रांति वश कोई बात कह सकते हैं।
"और परीक्षा करने पर यदि पता चले, कि वह दोष आपके अंदर नहीं है।
तो फिर उसकी भी चिंता ना करें।"
हां, उस सच्चे बुद्धिमान व्यक्ति को अपना स्पष्टीकरण अवश्य बता दें, कि "आपने जो दोष मेरे विषय में बताया है, वास्तव में वह दोष मुझमें नहीं है।
हो सकता है, कि आपको इस विषय में कुछ भ्रांति हो गई हो।"
"तब वह बुद्धिमान व्यक्ति फिर से आप की परीक्षा करेगा।
और आपकी बात यदि सत्य होगी, तो वह स्वीकार कर लेगा।
तब आप की वह चिंता भी दूर हो जाएगी।"
"यदि आप इतना कार्य करेंगे, तभी आप दुखों तनाव तथा चिन्ताओं से बच पाएंगे, और सुख से जीवन जी सकेंगे, अन्यथा नहीं।"
!! फूटा घड़ा !!
बहुत समय पहले की बात है।
किसी गाँव में एक किसान रहता था।
वह रोज़ भोर में उठकर दूर झरनों से स्वच्छ पानी लेने जाया करता था।
इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था, जिन्हें वो डंडे में बाँध कर अपने कंधे पर दोनों ओर लटका लेता था।
उनमें से एक घड़ा कहीं से फूटा हुआ था और दूसरा एक दम सही था।
इस वजह से रोज़ घर पहुँचते - पहुचते किसान के पास डेढ़ घड़ा पानी ही बच पाता था।
ऐसा दो सालों से चल रहा था।
सही घड़े को इस बात का घमंड था कि वो पूरा का पूरा पानी घर पहुंचता है और उसके अन्दर कोई कमी नहीं है।
वहीं दूसरी तरफ फूटा घड़ा इस बात से शर्मिंदा रहता था कि वो आधा पानी ही घर तक पंहुचा पाता है और किसान की मेहनत बेकार चली जाती है।
फूटा घड़ा ये सब सोच कर बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उससे रहा नहीं गया, उसने किसान से कहा- “मैं खुद पर शर्मिंदा हूँ और आपसे क्षमा मांगना चाहता हूँ ?”
“क्यों, किसान ने पूछा तुम किस बात से शर्मिंदा हो ?
“शायद आप नहीं जानते पर मैं एक जगह से फूटा हुआ हूँ और पिछले दो सालों से मुझे जितना पानी घर पहुँचाना चाहिए था बस उसका आधा ही पहुंचा पाया हूँ।
मेरे अन्दर ये बहुत बड़ी कमी है और इस वजह से आपकी मेहनत बर्बाद होती रही है, फूटे घड़े ने दुखी होते हुए कहा।
किसान को घड़े की बात सुनकर थोड़ा दुःख हुआ और वह बोला-
“कोई बात नहीं, मैं चाहता हूँ कि आज लौटते वक़्त तुम रास्ते में पड़ने वाले सुन्दर फूलों को देखो।”
घड़े ने वैसा ही किया, वह रास्ते भर सुन्दर फूलों को देखता आया, ऐसा करने से उसकी उदासी कुछ दूर हुई।
पर घर पहुँचते - पहुँचते फिर उसके अन्दर से आधा पानी गिर चुका था, वो मायूस हो गया और किसान से क्षमा मांगने लगा।
किसान बोला- शायद तुमने ध्यान नहीं दिया।
पूरे रास्ते में जितने भी फूल थे वो बस तुम्हारी तरफ ही थे, सही घड़े की तरफ एक भी फूल नहीं था।
ऐसा इस लिए क्योंकि मैं हमेशा से तुम्हारे अन्दर की कमी को जानता था और मैंने उसका लाभ उठाया।
मैंने तुम्हारे तरफ वाले रास्ते पर रंग - बिरंगे फूलों के बीज बो दिए थे, तुम रोज़ थोडा़ - थोडा़ कर के उन्हें सींचते रहे और पूरे रास्ते को इतना खूबसूरत बना दिया।
आज तुम्हारी वजह से ही मैं इन फूलों को भगवान को अर्पित कर पाता हूँ और अपना घर सुन्दर बना पाता हूँ।
तुम्हीं सोचो अगर तुम जैसे हो वैसे नहीं होते तो भला क्या मैं ये सब कुछ कर पाता?”
हम सभी के अन्दर कोई ना कोई कमी होती है, पर यही कमियां हमें अनोखा बनाती हैं।
उस किसान की तरह हमें भी हर किसी को वो जैसा है वैसे ही स्वीकारना चाहिए और उसकी अच्छाई की तरफ ध्यान देना चाहिए और जब हम ऐसा करेंगे तब “फूटा घड़ा” भी “अच्छे घड़े” से मूल्यवान हो जायेगा।
पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर:-
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:-
-: 25 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science)
" Opp. Shri Ramanathan Swami Covil Car Parking Ariya Strits , Nr. Maghamaya Amman Covil Strits , V.O.C. Nagar , RAMESHWARM - 623526 ( TAMILANADU )
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नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏
