सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता, किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........
जय द्वारकाधीश
।। श्री रामचरित्रमानस प्रवचन ।।
श्री रामचरित्रमानस प्रवचन
खुद पर भरोसे का अचूक मंत्र......
जामवंत जी ने हनुमान जी से ऐसा क्या कहा था जो आज के युवाओं के लिए सबसे बड़ा 'आत्मविश्वास का मंत्र' है?
रात के 2 बजे हैं।
कमरे में सन्नाटा है, बस घड़ी की टिक-टिक गूंज रही है।
नींद कोसों दूर है और सीने में एक अजीब सी धक-धक महसूस हो रही है।
सामने एक ऐसा पहाड़ खड़ा है—
चाहे वह कोई बेहद अहम परीक्षा हो, जीवन का कोई बड़ा संकट हो, कोई टूटता हुआ रिश्ता हो, या ज़िंदगी का कोई ऐसा मोड़ जहाँ आगे के सारे रास्ते धुंधले नज़र आ रहे हों।
उस पल, अंदर से एक ही चीख उठती है...!
Ram Darbar Murti, 8 cm Height, Black, 3D Printed, UV Resin, Ayodhya Mandir Ramdarbar Rama Sita Laxman Hanuman Idol for Home, Car Dashboard, Office, and Gift
Visit the MurtiHome Store https://amzn.to/4bkLeyW
"यार, ये मुझसे नहीं होगा।"
हम सबने इस पल को जिया है।
उस घुटन को महसूस किया है जब लगता है कि हम अपनी ही उम्मीदों के बोझ तले दब गए हैं।
बचपन में जब हम अंधेरे से डरते थे या किसी बात से घबराते थे, तो घर के बड़े - बुज़ुर्ग हमें जीवन - सुधार की कोई 500 पन्नों की भारी - भरकम किताब नहीं थमाते थे।
+++
+++
वे बस प्यार से सिर पर हाथ फेरते और कहते, "हनुमान जी का नाम ले लो, सब ठीक हो जाएगा।"
बड़े हुए, तो विज्ञान पढ़ा।
हर चीज़ को तर्क की कसौटी पर कसना शुरू किया।
युवा मन सोचने लगा कि भला कुछ शब्द दोहराने से क्या पहाड़ कट जाएंगे?
या समंदर पार हो जाएंगे?
+++
+++
लेकिन जैसे - जैसे ज़िंदगी के असली समंदर सामने आए और लहरों ने थपेड़े मारे, तब समझ में आया कि हमारे पूर्वजों ने धर्म और कथाओं के आवरण में मानव मन का कितना गहरा विज्ञान छिपा कर रखा था।
वे केवल कहानियां नहीं कह रहे थे; वे हमारे अवचेतन मन को भीतर से मज़बूत कर रहे थे।
आज, 'भारतीय विरासत' की इस यात्रा में, हम किसी अंधविश्वास की नहीं, बल्कि उस गहरे दर्शन की बात करेंगे जो रामचरितमानस की एक चौपाई में छिपा है।
एक ऐसी चौपाई जो दुनिया का सबसे बड़ा '"आत्मविश्वास का मंत्र"' और निराशा को चीरने वाली 'संजीवनी' है।
+++
+++
▪️वह शाम, जब हनुमान जी को उनका 'ईश्वरीय' रूप याद आया
एक दृश्य की कल्पना कीजिए।
भारत का दक्षिणी छोर।
सामने मीलों तक फैला, गर्जना करता हुआ अनंत समुद्र।
लहरें इतनी ऊँची मानो आसमान को निगल जाना चाहती हों।
तट पर वानर सेना हताश और निराश बैठी है।
सीता जी की खोज का समय धीरे - धीरे समाप्त हो रहा है और लंका तक पहुँचने का कोई मार्ग नहीं है।
+++
+++
सेना के सबसे वीर योद्धा—
अंगद, नल, नील—
सब अपनी - अपनी क्षमताओं का आकलन कर रहे हैं।
कोई कहता है "मैं जा तो सकता हूँ, पर वापस आने की ऊर्जा नहीं बचेगी।"
हर किसी के मन में गहरा संदेह है।
और इन सबके बीच, शोर से दूर, एक चट्टान पर चुपचाप हनुमान जी बैठे हैं।
सिर झुका हुआ है वे बिल्कुल मौन हैं अपनी ही शक्तियों से अनजान।
उन्हें अपनी क्षमताओं का कोई अंदाज़ा नहीं है।
+++
+++
बचपन के एक श्राप के कारण वे भूल चुके हैं कि वे पवनपुत्र हैं।
तब पूरी सेना के सबसे वयोवृद्ध और अनुभवी जामवंत जी उनके पास जाते हैं।
जामवंत जी उन्हें कोई जादुई जड़ी - बूटी नहीं देते।
वे उन्हें कोई नया अस्त्र - शस्त्र नहीं थमाते।
वे बस उनके पास जाते हैं और एक ऐसा वाक्य कहते हैं, जो इतिहास का सबसे शक्तिशाली मार्गदर्शन बन जाता है:
+++
+++
▪️"कवन सो काज कठिन जग माहीं।
जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥"
(अर्थ: हे तात! इस संसार में ऐसा कौन सा कठिन काम है, जो तुमसे न हो सके?
तुम तो राम के कार्य के लिए ही अवतरित हुए हो।)
ज़रा ठहर कर सोचिए...
क्या जामवंत जी ने हनुमान जी को कुछ नया दिया था?
नहीं न।
उन्होंने सिर्फ वह याद दिलाया जो पहले से उनके भीतर था।
हम अपनी शक्तियां क्यों भूल जाते हैं?
TIED RIBBONS Ram Lala Idol Murti (3.8 Inch, Small) for Home Pooja Room Mandir Temple Car Dashboard Office Table Decorative Ayodhya Ram Lalla Statue Gift Items
Visit the TIED RIBBONS Store https://amzn.to/4lAEIr3
हनुमान जी को बचपन में ऋषियों ने श्राप दिया था कि वे अपनी शक्तियां भूल जाएंगे, और जब कोई उन्हें याद दिलाएगा, तभी वे वापस आएंगी।
अगर हम इस कथा को आज के तर्क के चश्मे से देखें, तो क्या यह श्राप हम सब पर नहीं लगा है?
हम सबका श्राप है— अपनी सोई हुई शक्तियों को भूल जाना।
जब हम बच्चे होते हैं, तो हमें लगता है कि हम दुनिया बदल सकते हैं।
फिर हम धीरे - धीरे बड़े होते हैं।
+++
+++
बार - बार मिलने वाली असफलताओं पर दूसरों की टिप्पणियां और हमारा अपना डर ही हमारे दिमाग पर एक पर्दा डाल देता है।
हम मान लेते हैं कि हम बस 'साधारण' हैं।
हम अपनी ही बनाई हुई सीमाओं के जाल में फँस जाते हैं।
मानव स्वभाव में उस स्थिति को "'मान ली गई हार"' कहते हैं।
जब इंसान बार-बार हारता है तो वह मान लेता है कि जीतना असंभव है, भले ही परिस्थिति पूरी तरह बदल चुकी हो।
हनुमान जी तट पर उसी लाचारी का शिकार होकर बैठे थे।
जामवंत: मन को साधने वाले पहले गुरु
+++
+++
जब जामवंत जी ने हनुमान जी से कहा—
"कवन सो काज कठिन जग माहीं", तो वे मस्तिष्क को साधने की सबसे प्राचीन विद्या का प्रयोग कर रहे थे।
जब आप घबराहट में होते हैं और कहते हैं "मुझसे नहीं होगा", तो आपका मस्तिष्क गूगल की तरह तुरंत उन कारणों की पूरी सूची खोल देता है कि आप क्यों असफल होंगे।
लेकिन जब आप खुद से या कोई सच्चा गुरु आपसे कहता है, "ऐसा क्या है जो तुम नहीं कर सकते?",
तो मस्तिष्क का ध्यान तुरंत 'समस्या' से हटकर 'समाधान' पर चला जाता है।
+++
+++
▪️इस चौपाई का एक-एक शब्द विज्ञान है:
* कवन सो काज : यह आपके मस्तिष्क को चुनौती देता है।
* कठिन जग माहीं : यह स्वीकार करता है कि दुनिया में चुनौतियां हैं, लेकिन वे असंभव नहीं हैं।
* जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं : यह सीधे आपके मन की गहराइयों में असीम आत्मविश्वास का बीज बो देता है।
जैसे ही हनुमान जी ने ये शब्द सुने, उनका आत्म-संशय टूट गया।
उनके भीतर का वह पर्वत जाग उठा जो सो रहा था।
और जब वे जागे, तो उनका स्वरूप कुछ ऐसा था।
big size Poster of Ram Darbar with Frame (48 x 34 cm)| GOD PHOTO FRAMES | Hindu god photo | bhagwan photo Religious Frame
Visit the Suninow Store https://amzn.to/4d2jZuh
🚩"मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।"
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
(अर्थ: जो मन के समान तेज़ हैं, वायु के समान वेगवान हैं, जिन्होंने अपनी इंद्रियों को जीत लिया है, जो बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं... मैं उन श्रीरामदूत की शरण में हूँ।)
+++
+++
यह श्लोक बताता है कि जब आप अपने भीतर के संदेह को मिटा देते हैं, तो आपका वेग 'मन' के समान तेज़ हो जाता है। आप जो सोचते हैं, उसे यथार्थ में बदल सकते हैं।
▪️आज की पीढ़ी इसका उपयोग कैसे करे?
आज हमारे सामने लंका जाने का समुद्र नहीं है।
हमारे नए समुद्र हैं जैसे —
बेरोजगारी का डर, नए व्यापार के डूबने की चिंता, गहरी उदासी और रिश्तों की उलझनें आदि।
+++
+++
जब भी आपको लगे कि आप हार रहे हैं, जब बेचैनी आपको घेर ले और पसीने छूटने लगें, तो फोन पर दूसरों के प्रेरक विचार खोजने के बजाय, एक पल के लिए अपनी आँखें बंद करें...!
लंबी सांस लें।
और खुद के लिए 'जामवंत' बन जाएं।
खुद से कहें—
"कवन सो काज कठिन जग माहीं।
जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥"
इसे सिर्फ एक धार्मिक मंत्र की तरह नहीं, बल्कि मन को साधने वाले एक अचूक अस्त्र की तरह इस्तेमाल करें।
यह खुद को आदेश देने की सबसे शक्तिशाली तकनीक है।
जब आप इसे बार - बार दोहराते हैं, तो आपका मस्तिष्क डर के पुराने रास्तों को छोड़कर, जीत और आत्मविश्वास की नई दिशाएँ तय करने लगता है।
+++
+++
आप देखेंगे कि समस्या का जो पहाड़ कल तक अजेय लग रहा था, आज वह बस एक सीढ़ी नज़र आ रहा है।
हमारे पूर्वज मनोविज्ञान की इस युक्ति को बखूबी जानते थे कि मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन बाहर नहीं, उसके अपने दिमाग के भीतर बैठा डर है।
और उस डर को हराने के लिए उन्होंने हमें ये मंत्र, ये चौपाइयां एक धरोहर के रूप में दीं।
वह समुद्र जो हनुमान जी के सामने था, वह केवल खारे पानी का विस्तार नहीं था; वह हमारे और आपके भीतर बैठे 'संदेह' का समुद्र था।
और उसे पार करने के लिए किसी बाहरी पुल की आवश्यकता नहीं थी, वह पुल हमारे अपने आत्मविश्वास का था।
+++
+++
अगली बार जब दुनिया आपसे कहे या आपका अपना मन आपसे कहे कि "तुमसे नहीं होगा", तो मुस्कुराइयेगा।
क्योंकि आप उस संस्कृति के वारिस हैं, जहाँ हनुमान जी ने सिर्फ एक वाक्य सुनकर सूरज को फल समझ लिया था और समंदर को एक छलांग में लांघ दिया था।
आपके भीतर भी वही राम - काज करने वाली ऊर्जा सो रही है।
बस उसे जगाने की देर है!
+++
+++
जब ईश्वर ही टूटी हुई चीज से बहुत सुन्दरता से काम लेता है!
बादल टूटते हैं तो बारिश होती है !
मिट्टी टूटती है तो "खेत" बनते हैं !
फसल टूटती है तो अनाज " बीज" बनता है !
बीज टूटता है तो नया "पौधा" बनता है !
इस लिए जब भी अपने को टूटा हुआ महसूस करें तो समझ लीजिए ईश्वर हमारा उपयोग "बेहतर" करना चाहता है !!------
कुछ हंस कर बोल दो, कुछ हंस कर टाल दो, परेशानियां तो बहुत ही है , कुछ वक्त पर डाल दो !!---
+++
+++
समुद्र मंथन सा लग रहा है यह साल !
इतना विष निकल रहा है तो " अमृत" भी जरूर निकलेगा !!------
परिवार इंसान की वह सुरक्षा "कवच"है जिसमें रहकर व्यक्ति "सुख-शांति" का अनुभव करता है !!---
इस बार बहुत ठंड पड़ेगी कारण "पैसों" की गरमी सबकी निकल गई है !!-----
दीर्घ आयु के लिए " खुराक" आधी करें , पानी "दुगुना"करें, व्यायाम "तीगुना" करें, हंसना "चौगुना " करें और भगवान का ध्यान " सौगुना " करें !! -----
जिनके " रब " से रिश्ते गहरे होते हैं , उनके आज और कल "सुनहरे " होते हैं !!-
प्रदाने हि मुनिश्रेष्ठ कुलं निरवशेषतः।
वक्तव्यं कुलजातेन त नन्निबोध महामते।।
श्रीमद्वालमीकी रामायण प्रथम खंड
बालकांड, सर्ग - 71 श्लोक -2
+++
+++
राजा जनक जी महर्षि वशिष्ठ जी द्वारा महाराज दशरथ के कुल का परिचय दिए जाने पर अपने कुल का परिचय देते हुए महाराज दशरथ से अपने कुल का परिचय सुनने का अनुरोध करते हुए कहते है कि कन्या दान से पूर्व दोनो पक्षों के वंश कुल और जाति का पूर्ण रूपेण परिचय देना और प्राप्त करना दोनो पक्षों ( वर पक्ष और कन्या पक्ष ) के लिए आवश्यक है दोनो कुलों के आचार विचार गुण दुर्गुण और कृत्य कुकृत्य व्यवसाय यश अपयश कीर्ति अपकीर्ति पद तथा सामाजिक स्थिति और प्रतिष्ठा का पूर्ण रूपेण ज्ञान होने के बाद ही वैवाहिक संबंध करना चाहिए।
+++
+++
जो लोग जल्दबाजी में पुत्र या पुत्री के विवाह के समय एक दूसरे के कुल परंपरा का भलीभाती विचार किए बिना और केवल संबंधी वर या कन्या पक्ष द्वारा दी गई आधी अधूरी जानकारी से संतुष्ट होकर तथा वर और कन्या पक्ष के द्वारा प्राप्त जानकारी का अन्य माध्यमों यथा मित्रों शत्रुओं स्थानीय व्यक्तियों और संबंधियों से पुष्टि किए बिना ही वैवाहिक संबंध कर लेते है ऐसे व्यक्तियों के अधिकांशतः वैवाहिक संबंध कलह कारी होते है जो वर और वधू के जीवन को कष्टकारी बना देते है।
मनुष्य को वैवाहिक संबंध करते समय वर या वधू का रूप रंग और आर्थिक स्थिति ही नहीं बल्कि उनका स्वभाव आचार विचार कुल परंपरा तथा यश अपयश और कीर्ति अपकीर्ति का भी भली भांति विचार कर और उसका भलीभाती परीक्षण और पुष्टि करने के बाद ही वैवाहिक संबंध स्थापित करना चाहिए।
|| महर्षि वसिष्ठ जी की जय हो ||
!!!!! शुभमस्तु !!!
+++
+++
+++
+++


