सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता, किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........
जय द्वारकाधीश
।। प्राचीन अर्वाचीन विश्व हिन्दू सनातन संस्कृतिक कृतिओ 3. ।।1
प्राचीन अर्वाचीन विश्व हिन्दू सनातन संस्कृतिक कृतिओ 3 / श्री हनुमान जन्मोत्सव :
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🚩हनुमान जन्मोत्सव
श्री हनुमान जन्मोत्सव है।🚩
धर्म ग्रंथों में हनुमानजी के 12 नाम बताए गए हैं, मान्यता है कि हनुमानजी के इन 12 नामों का जो रात में सोने से पहले व सुबह उठने पर पाठ करता है, उसके सभी भय दूर हो जाते हैं और उसे अपने जीवन में सभी सुख प्राप्त होते हैं।
वह अपने जीवन में अनेक उपलब्धियां प्राप्त करता है।
हनुमानजी की 12 नामों वाली स्तुति इस प्रकार है-
⚜️ स्तुति
हनुमानअंजनीसूनुर्वायुपुत्रो महाबल:।
रामेष्ट: फाल्गुनसख: पिंगाक्षोअमितविक्रम:।।
उदधिक्रमणश्चेव सीताशोकविनाशन:।
लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा।।
एवं द्वादश नामानि कपीन्द्रस्य महात्मन:।
स्वापकाले प्रबोधे च यात्राकाले च य: पठेत्।।
तस्य सर्वभयं नास्ति रणे च विजयी भवेत्।
राजद्वारे गह्वरे च भयं नास्ति कदाचन।।
🙏🏻 हमेशा याद रखिये शब्द ही ब्रह्म है, इसको अपरोक्ष रूप से इस्लाम ने भी माना है इस लिये ही उनके पवित्र धर्म ग्रंथों में खुदा के 99 नामों का उल्लेख मिलता है l
इन 12 नामो से हनुमानजी की स्तुति की जाती है , इस स्तुति को पढ़ने से हनुमानजी की महिमा का ज्ञान होता है और यह शुभ एवं मंगलकारी है l
🙏🏻 🌷 हनुमान 🌷🙏
🌷 हनुमानजी का यह नाम इसलिए पड़ा क्योकि एक बार क्रोधित होकर देवराज इंद्र ने इनके ऊपर अपने वज्र का प्रहार किया था यह वज्र सीधे इनकी ठोड़ी ( हनु ) पर लगा।
हनु पर वज्र का प्रहार होने के कारण ही इनका नाम हनुमान पड़ा ।
🙏🏻 🌷 लक्ष्मणप्राणदाता🌷🙏
जब रावण के पुत्र इंद्रजीत ने शक्ति का उपयोग कर लक्ष्मण को बेहोश कर दिया था, तब हनुमानजी संजीवनी बूटी लेकर आए थे।
उसी बूटी के प्रभाव से लक्ष्मण को होश आया था।
इस लिए हनुमानजी को लक्ष्मणप्राणदाता भी कहा जाता है ।
परामर्श::
जब आपके प्राण संकट में हो तो सच्चे मन से इस नाम का स्मरण और हनुमानजी का ध्यान एवं स्मरण आपके प्राणों की रक्षा कर सकता है l
इस स्तुति का पूरा लाभ प्राप्त करने के लिये दूसरे प्राणियों के प्राणों की रक्षा का पुण्य अपने प्रारब्ध में संचित कीजिये अर्थात जीव हिंसा मत कीजिये बल्कि उनकी सेवा और रक्षा कीजिये , यही अर्जित पुण्य आपके प्राणों की रक्षा की स्तुति को बल प्रदान करेंगे और सभी अनिष्ट समाप्त हो जायेंगे l
🙏🏻 🌷 दशग्रीवदर्पहा🌷🙏
दशग्रीव यानी रावण और दर्पहा यानी धमंड तोड़ने वाला ।
हनुमानजी ने लंका जाकर सीता माता का पता लगाया, रावण के पुत्र अक्षयकुमार का वध किया साथ ही लंका में आग भी लगा दी ।
इस प्रकार हनुमानजी ने कई बार रावण का धमंड तोड़ा था ।
इस लिए इनका एक नाम ये भी प्रसिद्ध है ।
🙏🏻 🌷 रामेष्ट🌷🙏
हनुमान भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं ।
धर्म ग्रंथों में अनेक स्थानों पर वर्णन मिलता है कि श्रीराम ने हनुमान को अपना प्रिय माना है ।
भगवान श्रीराम को प्रिय होने के कारण ही इनका एक नाम रामेष्ट भी है ।
🙏🏻🌷 फाल्गुनसुख🌷🙏
महाभारत के अनुसार, पांडु पुत्र अर्जुन का एक नाम फाल्गुन भी है ।
युद्ध के समय हनुमानजी अर्जुन के रथ की ध्वजा पर विराजित थे ।
इस प्रकार उन्होंने अर्जुन की सहायता की ।
सहायता करने के कारण ही उन्हें अर्जुन का मित्र कहा गया है ।
फाल्गुन सुख का अर्थ है अर्जुन का मित्र ।
🙏🏻🌷 पिंगाक्ष🌷🙏
पिंगाक्ष का अर्थ है भूरी आंखों वाला ।
अनेक धर्म ग्रंथों में हनुमानजी का वर्णन किया गया है ।
उसमें हनुमानजी को भूरी आंखों वाला बताया है ।
इस लिए इनका एक नाम पिंगाक्ष भी है ।
🙏🏻 🌷अमितविक्रम🌷🙏
विक्रम का अर्थ है पराक्रमी और अमित का अर्थ है बहुत अधिक ।
हनुमानजी ने अपने पराक्रम के बल पर ऐसे बहुत से कार्य किए, जिन्हें करना देवताओं के लिए भी कठिन था ।
इस लिए इन्हें अमितविक्रम भी कहा जाता हैं ।
🙏🏻 🌷 उदधिक्रमण🌷🙏
उदधिक्रमण का अर्थ है समुद्र का अतिक्रमण करने वाले यानी लांधने वाला ।
सीता माता की खोज करते समय हनुमानजी ने समुद्र को लांधा था।
इस लिए इनका एक नाम ये भी है ।
🙏🏻🌷 अंजनीसुत🌷🙏
माता अंजनी के पुत्र होने के कारण ही हनुमानजी का एक नाम अंजनीसुत भी प्रसिद्ध है ।
🙏🏻 🌷 वायुपुत्र🌷🙏
हनुमानजी का एक नाम वायुपुत्र भी है ।
पवनदेव के पुत्र होने के कारण ही इन्हें वायुपुत्र भी कहा जाता है ।
🙏🏻🌷 महाबल 🌷🙏
हनुमानजी के बल की कोई सीमा नहीं हैं ।
इसलिए इनका एक नाम महाबल भी है ।
🙏🏻 🌷सीताशोकविनाशन🌷🙏
🚩माता सीता के शोक का निवारण करने के कारण हनुमानजी का ये नाम पड़ा ।🚩
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मूर्त्तं तमोऽसुरमयं तद्विधो विनिहन्ति य:
रात्रिजं सूर्यरूपी च तमुपेन्द्रं नमाम्यहम्।
यस्याक्षिणी चन्द्रसूर्यौ सर्वलोकशुभाशुभम्
पश्यत: कर्म सततं तमुपेन्द्रं नमाम्यहम्।।
यस्मिन् सर्वेश्वरे सर्वं सत्यमेतन्मयोदितम्
नानृतं तमजं विष्णुं नमामि प्रभवाव्ययम्।।
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जो सूर्यरूपी उपेन्द्र असुरमय रात्रि से उत्पन्न तमका विनाश करते हैं, मैं उनको प्रणाम करता हूं।
जिनकी सूर्य तथा चन्द्रमा - रूप दोनों आंखें समस्त लोकों के शुभाशुभ कर्मों को सतत् देखती रहती हैं, उन उपेन्द्र को मैं नमस्कार करता हूं।
जिन सर्वेश्वर के विषय में मेरा यह समस्त उद्गार सत्य है - असत्य नहीं है, उन अजन्मा, अव्यय एवं स्त्रष्टा विष्णु को मैं नमस्कार करता हूं।'
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त्वं वैष्णवी शक्तिरनन्तवीर्या
विश्वस्य बीजं परमासि माया।
सम्मोहितं देवि समस्तमेतत्
त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्तिहेतु:।।
तुम अनन्त बल समपन्न वैष्णवी शक्ति हो इस विश्व की कारण भूता परा माया हो।
देवि! तुमने इस जगत को मोहित कर रखा है।
तुम्हीं प्रसन्न होने पर इस पृथ्वी पर मोक्ष की प्राप्ति कराती हो।
|| लक्ष्मी नारायण की जय हो ||
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शांतकारं रूप प्रभु,
शेष शयन सुख पाय..!
शंख चक्र कर में धरे,
मन का तिमिर मिटाय..... ॥
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1- शांतकारं रूप प्रभु,
शेष शयन सुख पाय।
शांतकारं:-
इस का अर्थ है 'शांति की मूर्ति' या जिनका स्वरूप अत्यंत शांत और सौम्य है।
भगवान विष्णु का व्यक्तित्व हमें यह सिखाता है कि संसार की उथल - पुथल के बीच भी मन को स्थिर और शांत कैसे रखा जाए।
शेष शयन सुख पाय:-
भगवान विष्णु क्षीर सागर में शेषनाग' ( अनंत ) की शय्या पर विश्राम करते हैं।
यह इस बात का प्रतीक है कि भयानक परिस्थितियों ( सांपों के बीच ) में भी वे सुखपूर्वक और अविचलित रहते हैं।
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2. शंख चक्र कर में धरे,
मन का तिमिर मिटाय ॥
शंख चक्र कर में धरे: उनके हाथों ( 'कर' ) में 'शंख' और 'चक्र' सुशोभित हैं।
शंख 'नाद' ( ध्वनि ) और विजय का प्रतीक है, जबकि चक्र धर्म की रक्षा और बुराई के विनाश का।
मन का तिमिर मिटाय:- 'तिमिर' का अर्थ होता है अंधकार या अज्ञान।
इस पंक्ति का भाव यह है कि जब हम भगवान के इस दिव्य स्वरूप का ध्यान करते हैं, तो हमारे मन के भीतर छाया हुआ अज्ञान और दुखों का अंधकार मिट जाता है और ज्ञान का प्रकाश फैलता है।
|| लक्ष्मी नारायण भगवान की जय ||
!!!!! शुभमस्तु !!!
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जय माताजी 🙏🏻🙏🏻🙏🏻
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