*परमात्मा ने जो दिया है*

सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता,  किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........
जय द्वारकाधीश

*परमात्मा ने जो दिया है*


*एक बहुत अरबपति महिला ने एक गरीब चित्रकार से अपना चित्र बनवाया, पोट्रट बनवाया।* 

चित्र बन गया, तो वह अमीर महिला अपना चित्र लेने आयी। 

वह बहुत खुश थी। 

चित्रकार से उसने कहा, कि क्या उसका पुरस्कार दूं?





VAS COLLECTIONS Woolen Blanket Warm and Super Soft Heavy Weight Single Bed Blankets for Heavy Winter (Grey,152X225 cm,1400 Gram) (Charcoal & Grey), Breathable


Visit the VAS COLLECTIONS Store  https://amzn.to/48r5w6T

चित्रकार गरीब आदमी था।

 *गरीब आदमी वासना भी करे तो कितनी बड़ी करे, मांगे भी तो कितना मांगे?* 

हमारी मांग, सब गरीब आदमी की मांग है परमात्मा से। 

हम जो मांग रहे हैं, वहक्षुद्र है। 

जिससे मांग रहे हैं, उससे यह बात मांगनी नहीं चाहिए।

तो उसने सोचा मन में कि सौ डालर मांगूं, दो सौ डालर मांगूं, पांच सौ डालर मांगूं। 

*फिर उसकी हिम्मत डिगने लगी। 

इतना देगी, नहीं देगी!* 




फिर उसने सोचा कि बेहतर यह हो कि इसी पर छोड़ दूं, शायद ज्यादा दे। 

डर तो लगा मन में कि इस पर छोड़ दूं, पता नहीं दे या न दे, या कहीं कम दे और एक दफा छोड़ दिया तो फिर! 

*तो उसने फिर भी हिम्मत की। उसने कहा कि आपकी जो मर्जी। 

तो उसके हाथ में जो उसका बैग था, पर्स था, उसने कहा, तो अच्छा तो यह पर्स तुम रख लो। 

यह बडा कीमती पर्स है।* 

*पर्स तो कीमती था, लेकिन चित्रकार की छाती बैठ गयी कि पर्स को रखकर करूंगा भी क्या?* 

माना कि कीमती है और सुंदर है, पर इससे कुछ आता-जाता नहीं। 

इस से तो बेहतर था कुछ सौ डालर ही मांग लेते। 

तो उसने कहा, नहीं - नहीं, मैं पर्स का क्या करूंगा, आप कोई सौ डालर दे दें। 

*उस महिला ने कहा, तुम्हारी मर्जी। 

उसने पर्स खोला, उसमें एक लाख डालर थे, उसने सौ डालर निकाल कर चित्रकार को दे दिये* 

और पर्स लेकर वह चली गयी। 

सुना है कि चित्रकार अब तक छातीपीट रहा है और रो रहा है – मर गये, मारे गये, अपने से ही मारे गये! 

*आदमी करीब-करीब इस हालत में है। 

परमात्मा ने जो दिया है, वह बंद है, छिपा है।*

और हम मांगे जा रहे हैं – दो - दो पैसे, दो - दो कौड़ी की बात। 

और वह जीवन की जो संपदा उसने हमें दी है, उस पर्स को हमने खोल कर भी नहीं देखा है। 

*जो मिला है, वह जो आप मांग सकते हैं, उससे अनंत गुना ज्यादा है।* 

लेकिन मांग से फुरसत हो, तो दिखायी पड़े, वह जो मिला है।

जय श्री कृष्ण.......!!!



Bajaj DX-6 1000 Watts Dry Iron | Advance Soleplate And Anti-Bacterial German Coating Technology | Thermol Fuse Safety | Auto Shut-Off | Cool Touch Body | 2 Yr Warranty 【White】

Visit the Bajaj Store https://amzn.to/4rwyk6R



चिड़िया की सीख :


एक समय की बात है. एक राज्य में एक राजा राज करता था। 

उसके महल में बहुत ख़ूबसूरत बगीचा था। 

बगीचे की देखरेख की ज़िम्मेदारी एक माली के कंधों पर थी. माली पूरा दिन बगीचे में रहता और पेड़ - पौधों की अच्छे से देखभाल किया करता था। 

राजा माली के काम से बहुत ख़ुश था।

बगीचे में एक अंगूर की एक बेल लगी हुई थी, जिसमें ढेर सारे अंगूर फले हुए थे। 

एक दिन एक चिड़िया बगीचे में आई।उनसे अंगूर की बेल पर फले अंगूर चखे । 

अंगूर स्वाद में मीठे थे. उस दिन के बाद से वह रोज़ बाग़ में आने लगी।

चिड़िया अंगूर की बेल पर बैठती और चुन - चुनकर सारे मीठे अंगूर खा लेती. खट्टे और अधपके अंगूर वह नीचे गिरा देती. चिड़िया की इस हरक़त पर माली को बड़ा क्रोध आता। 

वह उसे भगाने का प्रयास करता, लेकिन सफ़ल नहीं हो पाता।

बहुत प्रयासों के बाद भी जब माली चिड़िया को भगा पाने में सफ़ल नहीं हो पाया, तो राजा के पास चला गया। 

उसने राजा को चिड़िया की पूरी कारिस्तानी बता दी और बोला, “महाराज! चिड़िया में मुझे तंग कर दिया है।

उसे काबू में करना मेरे बस के बाहर है. अब आप ही कुछ करें।
 
राजा ने ख़ुद ही चिड़िया से निपटने का निर्णय किया।

अगले दिन वह बाग़ में गया और अंगूर की घनी बेल की आड़ में छुपकर बैठ गया।

रोज़ की तरह चिड़िया आई और अंगूर की बेल पर बैठकर अंगूर खाने लगी. अवसर पाकर राजा ने उसे पकड़ लिया।

चिड़िया ने राजा की पकड़ से आज़ाद होने का बहुत प्रयास किया, किंतु सब व्यर्थ रहा।

अंत में वह राजा से याचना करने लगी कि वो उसे छोड़ दें. राजा इसके लिए तैयार नहीं हुआ. तब चिड़िया बोली, “राजन, यदि तुम मुझे छोड़ दोगे, तो मैं तुम्हें ज्ञान की ४ बातें बताऊंगी।

राजा चिड़िया पर क्रोधित था. किंतु इसके बाद भी उसने यह बात मान ली और बोला, “ठीक है, पहले तुम मुझे ज्ञान की वो ४ बातें बताओ. उन्हें सुनने के बाद ही मैं तय करूंगा कि तुम्हें छोड़ना ठीक रहेगा या नहीं.”

चिड़िया बोली, “ठीक है राजन. तो सुनो. पहली बात, कभी किसी हाथ आये शत्रु को जाने मत दो।”

“ठीक है और दूसरी बात?” राजा बोला।

“दूसरी ये है कि कभी किसी असंभव बात पर यकीन मत करो.” चिड़िया बोली।

“तीसरी बात?”

“बीती बात पर पछतावा मत करो.”

“और चौथी बात।

“राजन! चौथी बात बड़ी गहरी है. मैं तुम्हें वो बताना तो चाहती हूँ, किंतु तुमनें मुझे इतनी जोर से जकड़ रखा है कि मेरा दम घुट रहा है. तुम अपनी पकड़ थोड़ी ढीली करो, तो मैं तुम्हें चौथी बात बताऊं.” चिड़िया बोली,

राजा ने चिड़िया की बात मान ली और अपनी पकड़ ढीली कर दी। 

पकड़ ढ़ीली होने पर चिड़िया राजा एक हाथ छूट गई और उड़कर पेड़ की ऊँची डाल पर बैठ गई. राजा उसे ठगा सा देखता रह गया।

पेड़ की ऊँची डाल पर बैठी चिड़िया बोली, “राजन! चौथी बात ये कि ज्ञान की बात सुनने भर से कुछ नहीं होता. उस पर अमल भी करना पड़ता है। 

अभी कुछ देर पहले मैंने तुम्हें ज्ञान की ३ बातें बताई, जिन्हें सुनकर भी आपने उन्हें अनसुना कर दिया। 

पहली बात मैंने आपसे ये कही थी कि हाथ में आये शत्रु को कभी मत छोड़ना. लेकिन आपने अपने हाथ में आये शत्रु अर्थात् मुझे छोड़ दिया। 

दूसरी बात ये थी कि असंभव बात पर यकीन मत करें. लेकिन जब मैंने कहा कि चौथी बात बड़ी गहरी है, तो आप मेरी बातों में आ गए। 

तीसरी बात मैंने आपको बताई थी कि बीती बात पर पछतावा न करें और देखिये, मेरे आपके चंगुल से छूट जाने पर आप पछता रहे हैं।

इतना कहकर चिड़िया वहाँ से उड़ गई और राजा हाथ मलता रह गया.

शिक्षा:-

मात्र ज्ञान अर्जित करने से कोई ज्ञानी नहीं बन जाता. ज्ञानी वो होता है, जो अर्जित ज्ञान पर अमल करता है।

जीवन में जो बीत गया,उस पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं, किंतु वर्तमान हमारे हाथों में हैं।

आज का वर्तमान कल के भविष्य कल का निर्माण करेगा।

इस लिए वर्तमान में रहकर कर्म करें और अपना भविष्य बनायें..!!

!!!! शुभमस्तु !!!

🙏हर हर महादेव हर...!!

जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏

पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर:-
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:- 
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science
" Opp. Shri Ramanatha Swami Kovil Car Parking Ariya Strits , Nr. Maghamaya Amman Covil Strits, V.O.C. Nagar , RAMESHWARM - 623526 ( TAMILANADU )
सेल नंबर: . ‪‪+ 91- 7010668409‬‬ / ‪‪+ 91- 7598240825‬‬ ( तमिलनाडु )
Skype : astrologer85 Web: ‪Sarswatijyotish.com‬
Email: prabhurajyguru@gmail.com
आप इसी नंबर पर संपर्क/सन्देश करें...धन्यवाद.. 
नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

No comments:

Post a Comment

।। श्री यजुर्वेद प्रवचन ।।औषधियों में विराजमान नवदुर्गा...।।

सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता,  किसी ने किसी का लेखो की कोप...