*आज सोने से पहले* *सकारात्मक सोच*

सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता,  किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........
जय द्वारकाधीश

*आज सोने से पहले*

 *सकारात्मक सोच*

किसी गाँव में दो साधू रहते थे. वे दिन भर भीख मांगते और मंदिर में पूजा करते थे। 

एक दिन गाँव में आंधी आ गयी और बहुत जोरों की बारिश होने लगी; दोनों साधू गाँव की सीमा से लगी एक झोपडी में निवास करते थे, शाम को जब दोनों वापस पहुंचे तो देखा कि आंधी - तूफ़ान के कारण उनकी आधी झोपडी टूट गई है। 








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यह देखकर पहला साधू क्रोधित हो उठता है और बुदबुदाने लगता है ,” भगवान तू मेरे साथ हमेशा ही गलत करता है…! 

में दिन भर तेरा नाम लेता हूँ , मंदिर में तेरी पूजा करता हूँ फिर भी तूने मेरी झोपडी तोड़ दी…! 

गाँव में चोर – लुटेरे झूठे लोगो के तो मकानों को कुछ नहीं हुआ , बिचारे हम साधुओं की झोपडी ही तूने तोड़ दी ये तेरा ही काम है…!

हम तेरा नाम जपते हैं पर तू हमसे प्रेम नहीं करता….”

तभी दूसरा साधू आता है और झोपडी को देखकर खुश हो जाता है नाचने लगता है और कहता है भगवान् आज विश्वास हो गया तू हमसे कितना प्रेम करता है ये हमारी आधी झोपडी तूने ही बचाई होगी वर्ना इतनी तेज आंधी – तूफ़ान में तो पूरी झोपडी ही उड़ जाती ये तेरी ही कृपा है कि अभी भी हमारे पास सर ढंकने को जगह है….! 

निश्चित ही ये मेरी पूजा का फल है , कल से मैं तेरी और पूजा करूँगा , मेरा तुझपर विश्वास अब और भी बढ़ गया है… तेरी जय हो !





मित्रों एक ही घटना को एक ही जैसे दो लोगों ने कितने अलग-अलग ढंग से देखा …! 

हमारी सोच हमारा भविष्य तय करती है , हमारी दुनिया तभी बदलेगी जब हमारी सोच बदलेगी। 

यदि हमारी सोच पहले वाले साधू की तरह होगी तो हमें हर चीज में कमी ही नजर आएगी और अगर दूसरे साधू की तरह होगी तो हमे हर चीज में अच्छाई दिखेगी….!

अतः हमें दूसरे साधू की तरह विकट से विकट परिस्थिति में भी अपनी सोच सकारात्मक बनाये रखनी चाहिए।*

*जय श्री कृष्णा*
 
▪लोग तेज़ी में हैं। 

लोग अब चलते नहीं — दौड़ते हैं।

हर दिन और तेज़, और तेज़... उनके वाहन हर दिन और तेज़ होते जा रहे हैं।

अब जापान में ऐसी ट्रेनें हैं...!

जो चार सौ मील प्रति घंटे की गति से चल सकती हैं।

और यह अंत नहीं है — जापानी वैज्ञानिक कहते हैं कि जल्द ही किसी भी गति से ट्रेन चलाना संभव होगा...!,

क्योंकि चार सौ मील प्रति घंटे की रफ़्तार एक सीमा थी — और वह पार कर ली गई है।

जब कोई ट्रेन चार सौ मील प्रति घंटे की रफ़्तार से चलती है, तो वह पटरियों से लगभग एक फुट ऊपर उठ जाती है —

सिर्फ गति के कारण।

वह लगभग हवा में होती है — 

जैसे कोई हवाई जहाज़, बस ज़मीन से एक फुट ऊपर।

अब कोई कारण नहीं कि वह एक हज़ार मील प्रति घंटे की रफ़्तार से न चले।

लेकिन जापानी कहते हैं —

“जापान बहुत छोटा देश है, हमें इतनी गति की ज़रूरत नहीं।

चार सौ मील प्रति घंटे ही बहुत ज़्यादा है..!

क्योंकि इतनी दूरी में तो हम एक सिरे से दूसरे सिरे तक पहुँच जाते हैं...!

और ट्रेन इतनी तेज़ है कि बीच में रुक भी नहीं सकती।”

तुम इतने स्टॉप्स और स्टेशन नहीं बना सकते।

अगर ट्रेन एक हज़ार मील प्रति घंटे चले तो उसके सिर्फ़ दो ही स्टेशन होंगे —

शुरुआत और अंत।

गति आधुनिक मनुष्य की सबसे बड़ी बीमारियों में से एक है...!,

क्योंकि इसने उन चीज़ों को असंभव बना दिया है...!

जो केवल धैर्य में ही घट सकती हैं।

प्रेम धैर्य में खिलता है...!,

लेकिन तुम इतने तेज़ हो गए हो कि अब प्रेम से ज़्यादा सिर्फ़ तलाक़ ही जन्म ले सकता है।

तुम्हारी इस रफ़्तार में प्रेम अस्तित्वहीन हो गया है।

उसे धैर्य चाहिए।

कुछ फूल ऐसे होते हैं जो मौसम के साथ खिलते हैं —

छह हफ्तों में वे खिलते हैं...!,

और छह हफ्तों में मुरझा भी जाते हैं।

बीज से मृत्यु तक उनका पूरा जीवन केवल बारह हफ्तों का होता है।

लेकिन यदि तुम एक ऐसे वृक्ष की कामना करते हो जैसे —

लेबनॉन के देवदार (Cedars of Lebanon)

या कैलिफ़ोर्निया के रेडवुड्स (Redwoods) —

जो हज़ारों वर्षों तक जीवित रहते हैं...!

आकाश की ऊँचाइयों तक उठते हैं...! 

तो उन्हें समय देना होगा।

उनमें एक गौरव होता है, एक व्यक्तित्व होता है।

लेबनॉन के देवदारों में एक शाही भव्यता होती है;

उनकी तुलना में बाकी सब बौने लगते हैं —

पर उन्हें समय लगता है।

चार सौ वर्ष, पाँच सौ वर्ष उनके लिए कुछ भी नहीं।

वे दो हज़ार वर्षों तक बढ़ते रह सकते हैं...!,

और तब भी युवा रहते हैं।

वे बूढ़े कहीं चार या पाँच हज़ार वर्षों में होते हैं।

अब, तुम उन्हें छह हफ्तों में उगाना नहीं चाह सकते।

अगर तुम ज़िद कर लो कि सब कुछ छह हफ्तों में ही घटे, तो फिर तुम्हें लेबनॉन के देवदारों के अस्तित्व को नकारना पड़ेगा।

😊🙏🏻😊
!!!!! शुभमस्तु !!!

🙏हर हर महादेव हर...!!
जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏

पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर:-
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:- 
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science) 
" Opp. Shri Ramanatha Swami Kovil Car Parking Ariya Strits , Nr. Maghamaya Amman Covil Strits, V.O.C. Nagar , RAMESHWARM - 623526 ( TAMILANADU )
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आप इसी नंबर पर संपर्क/सन्देश करें...धन्यवाद.. 
नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

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।। श्री यजुर्वेद प्रवचन ।।औषधियों में विराजमान नवदुर्गा...।।

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