सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता, किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........
जय द्वारकाधीश
।। श्री यजुर्वेद प्रवचन ।।
*औषधियों में विराजमान नवदुर्गा...!*
*घर में 9 पौधे अवश्य लगाएं...*
एक मत यह कहता है कि ब्रह्माजी के दुर्गा कवच में वर्णित नवदुर्गा नौ विशिष्ट औषधियों में विराजमान हैं।
*1. शैलपुत्री (हरड़)*🌱🌱
कई प्रकार के रोगों में काम आने वाली औषधि हरड़ हिमावती है जो देवी शैलपुत्री का ही एक रूप है।
Decorative Wall Clock with Hindu God Figurine, 30 cm Diameter (Lord Shiva)
Brand: Generic https://amzn.to/3JqpuGK
यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है।
यह पथया, हरीतिका, अमृता, हेमवती, कायस्थ, चेतकी और श्रेयसी सात प्रकार की होती है।
*2. ब्रह्मचारिणी (ब्राह्मी)*🌱🌱
ब्राह्मी आयु व याददाश्त बढ़ाकर, रक्तविकारों को दूर कर स्वर को मधुर बनाती है।
इसलिए इसे सरस्वती भी कहा जाता है।
*3. चंद्रघंटा (चंदुसूर)*🌱🌱
यह एक ऎसा पौधा है जो धनिए के समान है।
यह औषधि मोटापा दूर करने में लाभप्रद है इसलिए इसे चर्महंती भी कहते हैं।
*4. कूष्मांडा (पेठा)*🌱🌱
इस औषधि से पेठा मिठाई बनती है।
इसलिए इस रूप को पेठा कहते हैं।
इसे कुम्हड़ा भी कहते हैं जो रक्त विकार दूर कर पेट को साफ करने में सहायक है।
मानसिक रोगों में यह अमृत समान है।
+++
+++
*5. स्कंदमाता (अलसी)*🌱🌱
देवी स्कंदमाता औषधि के रूप में अलसी में विद्यमान हैं।
यह वात, पित्त व कफ रोगों की नाशक औषधि है।
*6. कात्यायनी (मोइया)*🌱🌱
देवी कात्यायनी को आयुर्वेद में कई नामों से जाना जाता है जैसे अम्बा, अम्बालिका व अम्बिका।
इसके अलावा इन्हें मोइया भी कहते हैं।
यह औषधि कफ, पित्त व गले के रोगों का नाश करती है।
*7. कालरात्रि (नागदौन)*🌱🌱
यह देवी नागदौन औषधि के रूप में जानी जाती हैं।
यह सभी प्रकार के रोगों में लाभकारी और मन एवं मस्तिष्क के विकारों को दूर करने वाली औषधि है।
+++
+++
*8. महागौरी (तुलसी)*🌱🌱
तुलसी सात प्रकार की होती है सफेद तुलसी, काली तुलसी, मरूता, दवना, कुढेरक, अर्जक और षटपत्र।
ये रक्त को साफ कर ह्वदय रोगों का नाश करती है।
*9. सिद्धिदात्री (शतावरी)*🌱🌱
दुर्गा का नौवां रूप सिद्धिदात्री है जिसे नारायणी शतावरी कहते हैं।
यह बल, बुद्धि एवं विवेक के लिए उपयोगी है।
☘️ *एक कदम आयुर्वेद की ओर*☘️
🌹गुड मिठाई नहीं अमृत है🌹
( आयुर्वेदिक शास्त्र एवं ज्ञान )
😎👉 *गुड़ में भरपुर विटामिन और मिनरल्स पाएं जाते हैं, जो स्किन को पोषित करते हैं।
उदाहरण : ⤵
🌹👇👇👇🌹
⏩ गुड़ से स्किन सॉफ्ट, हेल्दी, हाइड्रेट और ग्लोइंग बनती है।
⏩ इससे चेहरे पर *झुर्रिया भी नहीं पड़ती और यह पिंपल्स होने से भी रोकता है।
🌲गुड़ के चमत्कारिक फायदे🌲
🌷कम करें वजन🌷
🔥 *मीठा खाने से कैलोरी बढ़ती है जिससे वजन ज्यादा होने लगता है, लेकिन गुड़ में पाएं जाने वाले मिनरल्स विशेषत पोटेशियम वजन को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। साथ ही यह मेटाबोलिज्म भी बढ़ाता है।
🌷कब्ज़ करें दूर🌷
🔥 *गुड़ पाचन का एक बहुत अच्छा साधन है। इससे पाचन तंत्र दुरूस्त बना रहता है और कब्ज, एसिडिटी जैसी समस्याएं नहीं होती है। खाने के बाद गुड़ खाना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद रहता है।
+++
+++
🌷घने बाल बनाएं🌷
🔥 *गुड़ आयरन का एक अच्छा स्त्रोत है।
इसे विटामिन सी से भरपुर चीजों जैसे नींबू, आंवला आदि के साथ खाने से बाल लंबे, घने, काले और हेल्दी बनते हैं।
ऎसा माना जाता है कि महिने में दो बार शैंपू से पहले गुड़, मुल्तानी मिट्टी और दही का मिश्रण बालों में लगाने से बाल प्राकृतिक रूप से खूबसूरत और लंबे होते हैं।
🌷लिवर की करें सफाई🌷
🔥 *गुड़ का एक छोटा सा टुकड़ा आपके शरीर से अपशिष्ट पदार्थो को बाहर कर देता है।
अगर कोई एल्कोहल का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करता है तो लिवर की सफाई के लिए गुड़ बेस्ट है।
🌷जोड़ों के दर्द में सहायक🌷
🔥 *गुड़ में कैल्शियम पाया जाता है, जो हडि्डयों को मजबूत बनाता है।
गुड़ के सेवन से हडि्डयों से जुड़ी समस्याओं और जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है।
रोज अदरक के एक टुकड़े के साथ गुड़ खाने से जोड़ों का दर्द ठीक होता है और ज्वॉइंट्स मजबूत बनते हैं।
🌷अस्थमा को भगाएं🌷
🔥 *गुड़ में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाने से यह गले और फेफड़ों के इंफेक्शन से बचाव करता है।
साथ ही अस्थमा मरीज को सांस लेने में होने वाली दिक्कत को भी दूर करता है।
🌷इम्यूनिटी को करें मजबूत🌷
🔥 *गुड़ में एंटिऑक्सीडेंट्स, जिंक, सेलेनियम पाया जाता है, जो हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है।
जिससे बैक्टीरिया से लड़ने में मदद मिलती है।
इस लिए रोज एक छोटा सा गुड़ का टुकड़ा खाना चाहिए।
🌷खून की करें सफाई🌷
🔥 *अगर रोजाना गुड़ खाया जाएं तो यह खून को प्योरिफाई करता है।
इससे खून साफ रहता है।
गुड़ खाने से ब्लड हीमोग्लोबिन बढ़ता है और खून संबंधी कई बीमारियों की जोखिम कम होती है।
+++
+++
कुरुक्षेत्र का वो 'अंतिम सच' जिसने दुर्योधन को अंदर से तोड़ दिया! :
कल्पना कीजिए उस मंज़र की...!
18 दिनों के भीषण रक्तपात के बाद कुरुक्षेत्र का मैदान अब युद्धभूमि नहीं, शमशान बन चुका था।
जहाँ कल तक शंखनाद और तलवारों की खनखनाहट थी, आज वहां केवल मृत्यु का सन्नाटा गूंज रहा था।
टूटे हुए रथ, हाथियों के शव और रक्त से सनी मिट्टी के बीच, कुरु वंश का अभिमानी युवराज दुर्योधन अपनी टूटी जंघाओं के साथ पड़ा था।
उसकी सांसें उखड़ रही थीं, लेकिन आँखों में पराजय की आग और ह्रदय में 'छल' का आक्रोश अब भी धधक रहा था।
+++
+++
तभी वहां श्री कृष्ण का आगमन हुआ।
दुर्योधन ने कृष्ण को देखते ही अपना सारा विष उगल दिया,तुमने छल से मुझे हराया है कृष्ण! यदि धर्म युद्ध होता, तो पांडव कभी नहीं जीतते!त्रिलोकीनाथ कृष्ण मंद- मंद मुस्कुराए।
उनकी मुस्कान में व्यंग्य नहीं, करुणा और सत्य था।
उन्होंने कहा:-
+++
+++
दुर्योधन! तुम पांडवों के 'छल' को देख रहे हो, लेकिन अपने 'चयन' की भूल को नहीं।
तुम्हारी हार भीम की गदा से नहीं, तुम्हारे एक गलत निर्णय से हुई है।
वो एक निर्णय, जो इतिहास बदल सकता था।
कृष्ण ने उस राज से पर्दा उठाया, जिसने मरते हुए दुर्योधन की रूह को कंपा दिया।
कृष्ण बोले:-
तुम्हारी सेना में एक योद्धा ऐसा था,जो साक्षात 'काल' था।
जिसे यदि तुम सही समय पर कमान सौंपते, तो यह युद्ध 18 दिन नहीं केवल एक प्रहर में समाप्त हो जाता।
लेकिन तुमने 'हीरे' को छोड़कर 'कंकड़' पर दांव लगाया।वह योद्धा कोई और नहीं,गुरु द्रोण पुत्र अश्वत्थामा थे।
अश्वत्थामा: जिसे दुर्योधन ने कभी 'समझा' ही नहीं।
दुर्योधन अपनी मित्रता और भावनाओं में इतना अंधा था कि उसने कर्ण पर तो भरोसा किया, लेकिन अश्वत्थामा ( जो शिव के अंशावतार थे ) को अनदेखा कर दिया।
कृष्ण ने दुर्योधन को उसकी रणनीतिक भूलों का आईना दिखाया:-
+++
+++
आरंभ ( दिन 1 - 10 ):-
तुमने भीष्म को सेनापति बनाया, जो पांडवों से प्रेम करते थे।
वे उन्हें मारना ही नहीं चाहते थे।
मध्य ( दिन 11-15 )- तुमने द्रोणाचार्य को चुना, जो शिष्य - मोह में बंधे थे।
अंत ( दिन 16 - महाभूल ) जब द्रोण गिरे,तब तुम्हें अश्वत्थामा को चुनना चाहिए था।
उसका क्रोध पिता की मृत्यु के कारण चरम पर था।
वह 'रुद्र' बन चुका था।
किन्तु, तुमने क्या किया?
तुमने भावुकता में आकर कर्ण को चुना।
कर्ण वीर थे, दानवीर थे, लेकिन वे मरणशील थे।
जबकि अश्वत्थामा अमर थे।
क्यों अश्वत्थामा थे 'विजय की कुंजी' ?
कृष्ण ने अश्वत्थामा की शक्तियों का जो वर्णन किया,वह सुनकर दुर्योधन सन्न रह गया:-
रुद्र अवतार: -
अश्वत्थामा में भगवान शिव का क्रोध और शक्ति समाहित थी।
+++
+++
अजेय सामर्थ्य:-
जहाँ कृपाचार्य 60,000 योद्धाओं से लड़ सकते थे, अश्वत्थामा अकेले 72,000 महारथियों को धूल चटाने की क्षमता रखते थे।
सर्वश्रेष्ठ शिक्षा:-
उन्हें ज्ञान केवल द्रोण से नहीं, बल्कि परशुराम, व्यास और दुर्वासा जैसे ऋषियों से मिला था।
नारायणास्त्र का ज्ञान:-
अर्जुन के पास भी जिसका काट नहीं था, वह अस्त्र अश्वत्थामा के पास था।
कृष्ण ने कहा:-
दुर्योधन! यदि 16वें दिन सेनापति अश्वत्थामा होते,तो पांडव तो क्या, तीनों लोकों की शक्तियां भी उसे रोक नहीं पातीं।
प्रमाण:-
18वें दिन की वो 'काली रात' दुर्योधन को कृष्ण की बातों का प्रमाण उसी रात मिल गया।
जब वह मृत्यु शैया पर अंतिम सांसे ले रहा था, उसने अश्वत्थामा को अपना अंतिम सेनापति घोषित किया।
और फिर अश्वत्थामा ने तांडव किया।
अकेले अश्वत्थामा ने पांडवों के शिविर में घुसकर वह कर दिखाया जो 11 अक्षौहिणी सेना 18 दिनों में न कर सकी:-
धृष्टद्युम्न ( द्रोण का हत्यारा ) का वध।शिखंडी और पांचों उपपांडवों का संहार।
पांडवों की शेष बची पूरी सेना को एक ही रात में गाजर - मूली की तरह काट दिया।
सुबह जब दुर्योधन को यह समाचार मिला, तो उसकी आँखों से आंसू बह निकले।
यह आंसू खुशी के नहीं, गहरे पछतावे के थे।
उसके अंतिम शब्द मौन चीत्कार बन गए।
हाय! जिस शक्ति को मैं अंत में ढूंढ पाया, यदि उसे पहले पहचान लेता,तो आज कुरुक्षेत्र का विजेता मैं होता दुर्योधन की यह कहानी हमें प्रबंधन और जीवन का सबसे बड़ा पाठ पढ़ाती है:-
संसाधन होना ही काफी नहीं है, सही समय पर सही व्यक्ति की पहचान करना ही असली नेतृत्व है।
अक्सर हम भावनाओं या पूर्वाग्रहों में पड़कर अपने सबसे काबिल 'योद्धाओं को नजरअंदाज कर देते हैं, और जब तक हमें उनकी कीमत समझ आती है,तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
|| हरे कृष्णा जी ||
🌹🙏 आप स्वस्थ रहें सुरक्षित रहें 🙏🌹
+++
+++
जय माँ अंबे
+++
+++
